• पुरु॑ष ए॒वेदꣳ सर्वं॒ यद्भू॒तं यच्च॒ भा॒व्य॑म्। उ॒तामृ॑त॒त्वस्येशा॑नो॒ यदन्ने॑नाति॒रोह॑ति॥
  • ए॒तावा॑नस्य महि॒मातो॒ ज्यायाꣳ॑श्च॒ पूरु॑षः। पादो॑ऽस्य॒ विश्वा॑ भू॒तानि॑ त्रि॒पाद॑स्या॒मृतं॑ दि॒वि॥
  • त्रि॒पादू॒र्ध्व उदै॒त्पुरु॑षः॒ पादो॑ऽस्ये॒हाभ॑व॒त्पुनः॑। ततो॑ वि॒ष्वङ्व्य॑क्रामत्साशनानश॒ने अ॒भि॥
  • ततो॑ वि॒राडजायत वि॒राजो॒ अधि॒ पूरु॑षः। स जा॒तो अत्य॑रिच्यत प॒श्चाद्भूमि॒मथो॑ पु॒रः॥
  • तस्मा॑द्य॒ज्ञात्स॑र्व॒हुतः॒ सम्भृ॑तं पृषदा॒ज्यम्। प॒शूꣳस्ताꣳश्च॑क्रे वाय॒व्या॑नार॒ण्या ग्राम्या॑श्च॒ ये॥
  • तस्मा॑द्य॒ज्ञात्स॑र्व॒हुत॑ ऋ॒चः सामा॑नि जज्ञिरे। छन्दाꣳ॑सि जज्ञिरे॒ तस्मा॒द्यजु॒स्तस्मा॑दजायत॥
॥ श्रीमते रामनुजाय नमः ॥

प्रवेश प्रक्रिया

श्री पद्मवैद्यम् तीर्थ वेद विद्यालय में प्रवेश हेतु अपनाई जाने वाली संपूर्ण प्रक्रिया नीचे चरणबद्ध रूप में दी गई है। कृपया प्रत्येक चरण को ध्यानपूर्वक पढ़ें।

चरण 01

आवेदन पत्र प्राप्त करें

विद्यालय की वेबसाइट से ऑनलाइन प्रवेश आवेदन पत्र भरें अथवा विद्यालय कार्यालय से प्रवेश फॉर्म प्राप्त करें।

चरण 02

आवश्यक दस्तावेज़ जमा करें

आधार कार्ड, स्थानांतरण प्रमाणपत्र (TC), मार्कशीट, आय प्रमाणपत्र, बैंक पासबुक एवं फोटो सहित सभी आवश्यक दस्तावेज़ संलग्न करें।

चरण 03

साक्षात्कार एवं योग्यता परीक्षण

विद्यार्थी एवं अभिभावकों की विद्यालय आचार्यों द्वारा संक्षिप्त साक्षात्कार लिया जाएगा तथा वैदिक अध्ययन हेतु प्रारंभिक योग्यता परखी जाएगी।

चरण 04

प्रवेश की पुष्टि

साक्षात्कार में सफल विद्यार्थियों की सूची जारी की जाएगी तथा प्रवेश की पुष्टि हेतु अभिभावकों को सूचित किया जाएगा।

चरण 05

शुल्क जमा करें

निर्धारित शुल्क संरचना के अनुसार प्रवेश शुल्क एवं प्रथम किश्त निर्धारित समय-सीमा के भीतर जमा करें।

चरण 06

सत्र प्रारंभ

समस्त प्रक्रिया पूर्ण होने पर विद्यार्थी को छात्रावास में प्रवेश दिया जाएगा तथा वैदिक अध्ययन सत्र प्रारंभ होगा।

महत्वपूर्ण तिथियाँ

आवेदन पत्र प्रारंभ1 मार्च 2026
आवेदन पत्र जमा करने की अंतिम तिथि31 मई 2026
साक्षात्कार / योग्यता परीक्षण5 – 10 जून 2026
प्रवेश सूची जारी15 जून 2026
सत्र प्रारंभ1 जुलाई 2026

कृपया ध्यान दें: सीमित स्थानों के कारण प्रवेश पात्रता एवं मानदंड पूर्ण करने वाले विद्यार्थियों को प्राथमिकता के आधार पर प्रवेश दिया जाएगा। समय-सीमा के भीतर आवेदन करना सुनिश्चित करें।

"आचार्यात् पादमादत्ते" — शिष्य अपना ज्ञान गुरु से प्राप्त करता है; यह यात्रा प्रवेश के पहले चरण से ही आरंभ होती है।