• पुरु॑ष ए॒वेदꣳ सर्वं॒ यद्भू॒तं यच्च॒ भा॒व्य॑म्। उ॒तामृ॑त॒त्वस्येशा॑नो॒ यदन्ने॑नाति॒रोह॑ति॥
  • ए॒तावा॑नस्य महि॒मातो॒ ज्यायाꣳ॑श्च॒ पूरु॑षः। पादो॑ऽस्य॒ विश्वा॑ भू॒तानि॑ त्रि॒पाद॑स्या॒मृतं॑ दि॒वि॥
  • त्रि॒पादू॒र्ध्व उदै॒त्पुरु॑षः॒ पादो॑ऽस्ये॒हाभ॑व॒त्पुनः॑। ततो॑ वि॒ष्वङ्व्य॑क्रामत्साशनानश॒ने अ॒भि॥
  • ततो॑ वि॒राडजायत वि॒राजो॒ अधि॒ पूरु॑षः। स जा॒तो अत्य॑रिच्यत प॒श्चाद्भूमि॒मथो॑ पु॒रः॥
  • तस्मा॑द्य॒ज्ञात्स॑र्व॒हुतः॒ सम्भृ॑तं पृषदा॒ज्यम्। प॒शूꣳस्ताꣳश्च॑क्रे वाय॒व्या॑नार॒ण्या ग्राम्या॑श्च॒ ये॥
  • तस्मा॑द्य॒ज्ञात्स॑र्व॒हुत॑ ऋ॒चः सामा॑नि जज्ञिरे। छन्दाꣳ॑सि जज्ञिरे॒ तस्मा॒द्यजु॒स्तस्मा॑दजायत॥
॥ श्रीमते रामनुजाय नमः ॥

सचिव महोदय

सचिव महोदय

डॉ रङ्गनाथ त्रिपाठी

सचिव, श्री पद्मवैद्यम् तीर्थ वेद विद्यालय

डॉ रङ्गनाथ त्रिपाठी जी विद्यालय के प्रशासन, अनुशासन एवं दैनिक संचालन को सुव्यवस्थित रखने हेतु सदैव तत्पर रहे हैं। उनके कुशल प्रबंधन एवं समर्पित सेवा के फलस्वरूप विद्यालय में वैदिक शिक्षा, गुरु-शिष्य परंपरा तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास को निरंतर बल मिला है।

विद्यालय प्रबंधन एवं प्रशासन में 20+ वर्षों का अनुभव
महर्षि सान्दीपनि प्रतिष्ठान से दीर्घकालिक जुड़ाव
बटुकों एवं अभिभावकों के साथ निरंतर समन्वय
वैदिक शिक्षा एवं गुरु-शिष्य परंपरा के प्रसार हेतु समर्पित सेवा

सचिव महोदय का संदेश

प्रिय अभिभावकों एवं विद्यार्थियों,

श्री पद्मवैद्यम् तीर्थ वेद विद्यालय एक ऐसा पवित्र स्थल है जहाँ वेदों की अमूल्य परंपरा को जीवंत रखते हुए बटुकों को ज्ञान, संस्कार एवं अनुशासन की शिक्षा प्रदान की जाती है। विद्यालय के सुचारू संचालन, विद्यार्थियों की सुविधा तथा शैक्षणिक वातावरण की पवित्रता बनाए रखना हमारा प्रमुख दायित्व है।

हमारा प्रयास है कि प्रत्येक बटुक को गुरुकुल परंपरा के अनुरूप उत्तम शिक्षा, आवास एवं मार्गदर्शन प्राप्त हो, तथा अभिभावकों का विश्वास निरंतर सुदृढ़ होता रहे। मैं सभी आचार्यगण, अभिभावकों एवं सहयोगियों के प्रति हृदय से आभार व्यक्त करता हूँ, जिनके सहयोग से विद्यालय निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर है।

सादर,
डॉ रङ्गनाथ त्रिपाठी
सचिव, श्री पद्मवैद्यम् तीर्थ वेद विद्यालय