• पुरु॑ष ए॒वेदꣳ सर्वं॒ यद्भू॒तं यच्च॒ भा॒व्य॑म्। उ॒तामृ॑त॒त्वस्येशा॑नो॒ यदन्ने॑नाति॒रोह॑ति॥
  • ए॒तावा॑नस्य महि॒मातो॒ ज्यायाꣳ॑श्च॒ पूरु॑षः। पादो॑ऽस्य॒ विश्वा॑ भू॒तानि॑ त्रि॒पाद॑स्या॒मृतं॑ दि॒वि॥
  • त्रि॒पादू॒र्ध्व उदै॒त्पुरु॑षः॒ पादो॑ऽस्ये॒हाभ॑व॒त्पुनः॑। ततो॑ वि॒ष्वङ्व्य॑क्रामत्साशनानश॒ने अ॒भि॥
  • ततो॑ वि॒राडजायत वि॒राजो॒ अधि॒ पूरु॑षः। स जा॒तो अत्य॑रिच्यत प॒श्चाद्भूमि॒मथो॑ पु॒रः॥
  • तस्मा॑द्य॒ज्ञात्स॑र्व॒हुतः॒ सम्भृ॑तं पृषदा॒ज्यम्। प॒शूꣳस्ताꣳश्च॑क्रे वाय॒व्या॑नार॒ण्या ग्राम्या॑श्च॒ ये॥
  • तस्मा॑द्य॒ज्ञात्स॑र्व॒हुत॑ ऋ॒चः सामा॑नि जज्ञिरे। छन्दाꣳ॑सि जज्ञिरे॒ तस्मा॒द्यजु॒स्तस्मा॑दजायत॥
॥ श्रीमते रामनुजाय नमः ॥

संस्कृत भाषा विभाग

संस्कृत भाषा वेद, व्याकरण एवं साहित्य के अध्ययन की नींव है। हमारे विभाग में विद्यार्थियों को संस्कृत की मूल दक्षता — उच्चारण, पठन, लेखन एवं संभाषण — का व्यवस्थित एवं जीवंत अभ्यास कराया जाता है, जो उन्हें अन्य सभी विभागों के अध्ययन हेतु सक्षम बनाता है।

विभागीय शिक्षक

आचार्य श्री सूर्यकांत जोशी

आचार्य श्री सूर्यकांत जोशी

विभागाध्यक्ष – संस्कृत भाषा विभाग
विशेषज्ञता: संस्कृत संभाषण एवं भाषा शिक्षण
वेद विभूषण, पौरोहित्य विशारद
10+ वर्ष का अनुभव
श्रीमती पूजा शर्मा

श्रीमती पूजा शर्मा

सहायक शिक्षिका – संस्कृत भाषा विभाग
विशेषज्ञता: पठन-लेखन कौशल एवं बाल संस्कृत शिक्षण
शास्त्री (संस्कृत), बी.एड.
5+ वर्ष का अनुभव

शिक्षण की मुख्य विशेषताएँ

संस्कृत वर्णमाला एवं उच्चारण

विद्यार्थियों को संस्कृत की देवनागरी वर्णमाला, स्वर-व्यंजन का शुद्ध उच्चारण तथा मात्रा ज्ञान का प्रारंभिक एवं व्यवस्थित अभ्यास कराया जाता है, जो वेद अध्ययन की नींव है।

संभाषण एवं दैनिक वार्तालाप

'संस्कृत भारती' जैसी आधुनिक पद्धतियों के माध्यम से विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में सरल संस्कृत वाक्यों में बातचीत करने का व्यावहारिक अभ्यास कराया जाता है, जिससे भाषा जीवंत बनी रहे।

पठन एवं लेखन कौशल

सरल संस्कृत गद्य-पद्य, श्लोक एवं कथाओं के माध्यम से पठन कौशल तथा संस्कृत में सरल वाक्य-रचना एवं लेखन अभ्यास से विद्यार्थियों की लेखन क्षमता विकसित की जाती है।

समस्त विभागों की आधारशिला

संस्कृत भाषा की मूल दक्षता व्याकरण, साहित्य, वेद-अध्ययन एवं दर्शन जैसे सभी विभागों के अध्ययन हेतु अनिवार्य आधार प्रदान करती है, इसीलिए इसका शिक्षण सर्वप्रथम एवं सतत रूप से कराया जाता है।

वर्ष-वार अध्ययन क्रम

प्रथम – द्वितीय वर्षसंस्कृत वर्णमाला एवं मात्राएँ, सरल शब्द एवं चित्र-आधारित शब्द ज्ञान, नमस्ते एवं दैनिक अभिवादन के सरल वाक्य
तृतीय – चतुर्थ वर्षसरल संस्कृत वाक्य रचना, दैनिक वस्तुओं एवं क्रियाओं के नाम, छोटी संस्कृत कहानियों का पठन एवं श्रवण
पंचम वर्षसामान्य संभाषण अभ्यास, सुभाषित एवं श्लोक कंठस्थीकरण, सरल संस्कृत निबंध लेखन, वेद भूषण मूल्यांकन परीक्षा हेतु तैयारी
षष्ठम – सप्तम वर्ष (वेद विभूषण)धाराप्रवाह संस्कृत संभाषण क्षमता का विकास, संस्कृत में प्रश्नोत्तर एवं शास्त्रार्थ अभ्यास, स्वतंत्र संस्कृत लेखन एवं अभिव्यक्ति कौशल

कृपया ध्यान दें: संस्कृत भाषा विभाग का शिक्षण व्याकरण एवं साहित्य विभागों के साथ समन्वित रूप से कराया जाता है, ताकि विद्यार्थी संस्कृत की मूल दक्षता के साथ-साथ शास्त्रीय अध्ययन हेतु भी सक्षम बनें। विस्तृत जानकारी हेतु पाठ्यक्रम विवरणिका पृष्ठ देखें।

"संस्कृतं देववाणी अस्ति" — संस्कृत देवभाषा है, जो भारतीय ज्ञान परंपरा की समस्त धरोहर को अपने में समेटे हुए है।