संस्कृत भाषा वेद, व्याकरण एवं साहित्य के अध्ययन की नींव है। हमारे विभाग में विद्यार्थियों को संस्कृत की मूल दक्षता — उच्चारण, पठन, लेखन एवं संभाषण — का व्यवस्थित एवं जीवंत अभ्यास कराया जाता है, जो उन्हें अन्य सभी विभागों के अध्ययन हेतु सक्षम बनाता है।


विद्यार्थियों को संस्कृत की देवनागरी वर्णमाला, स्वर-व्यंजन का शुद्ध उच्चारण तथा मात्रा ज्ञान का प्रारंभिक एवं व्यवस्थित अभ्यास कराया जाता है, जो वेद अध्ययन की नींव है।
'संस्कृत भारती' जैसी आधुनिक पद्धतियों के माध्यम से विद्यार्थियों को दैनिक जीवन में सरल संस्कृत वाक्यों में बातचीत करने का व्यावहारिक अभ्यास कराया जाता है, जिससे भाषा जीवंत बनी रहे।
सरल संस्कृत गद्य-पद्य, श्लोक एवं कथाओं के माध्यम से पठन कौशल तथा संस्कृत में सरल वाक्य-रचना एवं लेखन अभ्यास से विद्यार्थियों की लेखन क्षमता विकसित की जाती है।
संस्कृत भाषा की मूल दक्षता व्याकरण, साहित्य, वेद-अध्ययन एवं दर्शन जैसे सभी विभागों के अध्ययन हेतु अनिवार्य आधार प्रदान करती है, इसीलिए इसका शिक्षण सर्वप्रथम एवं सतत रूप से कराया जाता है।
कृपया ध्यान दें: संस्कृत भाषा विभाग का शिक्षण व्याकरण एवं साहित्य विभागों के साथ समन्वित रूप से कराया जाता है, ताकि विद्यार्थी संस्कृत की मूल दक्षता के साथ-साथ शास्त्रीय अध्ययन हेतु भी सक्षम बनें। विस्तृत जानकारी हेतु पाठ्यक्रम विवरणिका पृष्ठ देखें।
"संस्कृतं देववाणी अस्ति" — संस्कृत देवभाषा है, जो भारतीय ज्ञान परंपरा की समस्त धरोहर को अपने में समेटे हुए है।