• पुरु॑ष ए॒वेदꣳ सर्वं॒ यद्भू॒तं यच्च॒ भा॒व्य॑म्। उ॒तामृ॑त॒त्वस्येशा॑नो॒ यदन्ने॑नाति॒रोह॑ति॥
  • ए॒तावा॑नस्य महि॒मातो॒ ज्यायाꣳ॑श्च॒ पूरु॑षः। पादो॑ऽस्य॒ विश्वा॑ भू॒तानि॑ त्रि॒पाद॑स्या॒मृतं॑ दि॒वि॥
  • त्रि॒पादू॒र्ध्व उदै॒त्पुरु॑षः॒ पादो॑ऽस्ये॒हाभ॑व॒त्पुनः॑। ततो॑ वि॒ष्वङ्व्य॑क्रामत्साशनानश॒ने अ॒भि॥
  • ततो॑ वि॒राडजायत वि॒राजो॒ अधि॒ पूरु॑षः। स जा॒तो अत्य॑रिच्यत प॒श्चाद्भूमि॒मथो॑ पु॒रः॥
  • तस्मा॑द्य॒ज्ञात्स॑र्व॒हुतः॒ सम्भृ॑तं पृषदा॒ज्यम्। प॒शूꣳस्ताꣳश्च॑क्रे वाय॒व्या॑नार॒ण्या ग्राम्या॑श्च॒ ये॥
  • तस्मा॑द्य॒ज्ञात्स॑र्व॒हुत॑ ऋ॒चः सामा॑नि जज्ञिरे। छन्दाꣳ॑सि जज्ञिरे॒ तस्मा॒द्यजु॒स्तस्मा॑दजायत॥
॥ श्रीमते रामनुजाय नमः ॥

सामवेद विभाग

सामवेद संगीतमय सस्वर गान एवं स्तुतियों की समृद्ध परंपरा पर आधारित है। हमारे विभाग में विद्यार्थियों को उद्गाता परंपरा के अनुसार शुद्ध स्वर एवं गान विद्या का गहन प्रशिक्षण दिया जाता है।

विभागीय आचार्य

श्री रूपेश पाण्डेय

श्री रूपेश पाण्डेय

सामवेदाध्यापक
विशेषज्ञता:
शास्त्री
5 वर्ष का अनुभव

शाखा एवं ग्रंथ परिचय

सामवेद संहिता

सामवेद ऋग्वेद के ही अनेक मंत्रों को संगीतमय स्वरों में गाने की परंपरा पर आधारित है। इसे 'साम' अर्थात गान कहा जाता है, जो यज्ञ के दौरान उद्गाता द्वारा गाया जाता है।

कौथुमीय एवं जैमिनीय शाखा

सामवेद की प्रमुख शाखाओं में कौथुमीय, राणायनीय एवं जैमिनीय शाखा प्रचलित हैं। हमारे विद्यालय में परंपरा एवं क्षेत्रीय प्रचलन के अनुसार शाखा का अध्ययन कराया जाता है।

गान एवं स्वर विज्ञान

सामवेद के अध्ययन में सस्वर गान अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसमें उद्गीथ, प्रस्ताव, उद्गान, प्रतिहार एवं निधन जैसे संगीतमय अंगों का विस्तृत अभ्यास कराया जाता है।

छान्दोग्य उपनिषद

सामवेद की परंपरा से जुड़ा छान्दोग्य उपनिषद वेदांत दर्शन का एक प्रमुख ग्रंथ है, जिसमें ब्रह्मविद्या, आत्मज्ञान एवं ओंकार की महिमा का गहन विवेचन है।

वर्ष-वार अध्ययन क्रम

प्रथम – द्वितीय वर्षसामवेद संहिता का मूल पाठ, स्वर एवं लय का प्रारंभिक अभ्यास, संस्कृत वर्णमाला एवं प्रारंभिक व्याकरण
तृतीय – चतुर्थ वर्षगान पद्धति में दक्षता, उद्गीथ एवं प्रस्ताव का अभ्यास, वैदिक व्याकरण एवं छंदशास्त्र
पंचम वर्षपूर्ण सामगान का अभ्यास, वेद भूषण मूल्यांकन परीक्षा हेतु तैयारी, यज्ञोपवीत संस्कार एवं आचार शिक्षा
षष्ठम – सप्तम वर्ष (वेद विभूषण)उद्गाता कर्म का प्रायोगिक प्रशिक्षण, छान्दोग्य उपनिषद का अध्ययन, यज्ञ में सामगान संचालन क्षमता, संगीत शास्त्र का गहन अध्ययन

कृपया ध्यान दें: सामवेद (वेद विभूषण) पाठ्यक्रम की पूर्ण अवधि सात वर्ष निर्धारित है, जिसका उद्देश्य विद्यार्थी को इस शाखा में पूर्ण रूप से पारंगत बनाना है। विस्तृत जानकारी हेतु पाठ्यक्रम विवरणिका पृष्ठ देखें।

"अग्न आ याहि वीतये" — सामवेद का यह प्रथम गीत अग्नि देव के आह्वान का मंगल स्वर है।