• पुरु॑ष ए॒वेदꣳ सर्वं॒ यद्भू॒तं यच्च॒ भा॒व्य॑म्। उ॒तामृ॑त॒त्वस्येशा॑नो॒ यदन्ने॑नाति॒रोह॑ति॥
  • ए॒तावा॑नस्य महि॒मातो॒ ज्यायाꣳ॑श्च॒ पूरु॑षः। पादो॑ऽस्य॒ विश्वा॑ भू॒तानि॑ त्रि॒पाद॑स्या॒मृतं॑ दि॒वि॥
  • त्रि॒पादू॒र्ध्व उदै॒त्पुरु॑षः॒ पादो॑ऽस्ये॒हाभ॑व॒त्पुनः॑। ततो॑ वि॒ष्वङ्व्य॑क्रामत्साशनानश॒ने अ॒भि॥
  • ततो॑ वि॒राडजायत वि॒राजो॒ अधि॒ पूरु॑षः। स जा॒तो अत्य॑रिच्यत प॒श्चाद्भूमि॒मथो॑ पु॒रः॥
  • तस्मा॑द्य॒ज्ञात्स॑र्व॒हुतः॒ सम्भृ॑तं पृषदा॒ज्यम्। प॒शूꣳस्ताꣳश्च॑क्रे वाय॒व्या॑नार॒ण्या ग्राम्या॑श्च॒ ये॥
  • तस्मा॑द्य॒ज्ञात्स॑र्व॒हुत॑ ऋ॒चः सामा॑नि जज्ञिरे। छन्दाꣳ॑सि जज्ञिरे॒ तस्मा॒द्यजु॒स्तस्मा॑दजायत॥
॥ श्रीमते रामनुजाय नमः ॥

हिंदी विभाग

राष्ट्रभाषा हिंदी का शुद्ध एवं समृद्ध ज्ञान विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु अत्यंत आवश्यक है। हमारे विभाग में वैदिक शिक्षा के साथ-साथ हिंदी व्याकरण, साहित्य एवं अभिव्यक्ति कौशल का व्यवस्थित शिक्षण कराया जाता है।

विभागीय शिक्षक

श्रीमती सरिता चौबे

श्रीमती सरिता चौबे

विभागाध्यक्ष – हिंदी विभाग
विशेषज्ञता: हिंदी व्याकरण एवं साहित्य
एम.ए. (हिंदी), बी.एड.
12+ वर्ष का अनुभव
श्री दिनेश कुमार पाठक

श्री दिनेश कुमार पाठक

सहायक शिक्षक – हिंदी विभाग
विशेषज्ञता: रचनात्मक लेखन एवं वाक्पटुता प्रशिक्षण
एम.ए. (हिंदी साहित्य)
7+ वर्ष का अनुभव

शिक्षण की मुख्य विशेषताएँ

आधारभूत व्याकरण एवं शब्द भंडार

विद्यार्थियों को हिंदी वर्णमाला, संधि, समास, कारक, वाक्य रचना जैसे व्याकरण के मूल नियमों तथा दैनिक जीवन में उपयोगी शब्द भंडार का व्यवस्थित एवं क्रमिक अभ्यास कराया जाता है।

गद्य एवं पद्य साहित्य

हिंदी के प्रमुख कवियों एवं लेखकों (तुलसीदास, कबीर, सूरदास, प्रेमचंद आदि) की रचनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों में साहित्यिक अभिरुचि एवं भाषा-सौंदर्य की समझ विकसित की जाती है।

निबंध, पत्र एवं रचनात्मक लेखन

निबंध लेखन, पत्र लेखन, संवाद लेखन एवं रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से विद्यार्थियों की लेखन क्षमता एवं विचार-प्रस्तुति कौशल को निखारा जाता है।

मौखिक अभिव्यक्ति एवं वाक्पटुता

भाषण, वाद-विवाद एवं काव्य-पाठ जैसी गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में आत्मविश्वासपूर्ण एवं स्पष्ट मौखिक अभिव्यक्ति क्षमता का विकास किया जाता है।

वर्ष-वार अध्ययन क्रम

प्रथम – द्वितीय वर्षहिंदी वर्णमाला, मात्रा एवं शब्द ज्ञान, सरल वाक्य रचना, छोटी कहानियों एवं बाल कविताओं का पठन
तृतीय – चतुर्थ वर्षव्याकरण (संधि, समास, कारक) का विस्तृत अध्ययन, गद्यांश एवं पद्यांश पठन, सरल निबंध एवं पत्र-लेखन अभ्यास
पंचम वर्षप्रमुख कवियों एवं लेखकों की रचनाओं का अध्ययन, भाषण एवं वाद-विवाद अभ्यास, वेद भूषण मूल्यांकन परीक्षा हेतु तैयारी
षष्ठम – सप्तम वर्ष (वेद विभूषण)हिंदी साहित्य की विभिन्न विधाओं (कहानी, निबंध, कविता) का गहन अध्ययन, रचनात्मक लेखन एवं काव्य-पाठ में दक्षता, सार्वजनिक भाषण एवं प्रस्तुति कौशल का विकास

कृपया ध्यान दें: हिंदी विषय की कक्षाएँ वैदिक अध्ययन के साथ निर्धारित समय-सारणी के अनुसार नियमित रूप से संचालित की जाती हैं, ताकि विद्यार्थी वैदिक ज्ञान के साथ-साथ राष्ट्रभाषा में भी दक्ष बनें। विस्तृत जानकारी हेतु पाठ्यक्रम विवरणिका पृष्ठ देखें।

"निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल" — भारतेंदु हरिश्चंद्र का यह कथन मातृभाषा के महत्व को स्पष्ट करता है।