राष्ट्रभाषा हिंदी का शुद्ध एवं समृद्ध ज्ञान विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास हेतु अत्यंत आवश्यक है। हमारे विभाग में वैदिक शिक्षा के साथ-साथ हिंदी व्याकरण, साहित्य एवं अभिव्यक्ति कौशल का व्यवस्थित शिक्षण कराया जाता है।


विद्यार्थियों को हिंदी वर्णमाला, संधि, समास, कारक, वाक्य रचना जैसे व्याकरण के मूल नियमों तथा दैनिक जीवन में उपयोगी शब्द भंडार का व्यवस्थित एवं क्रमिक अभ्यास कराया जाता है।
हिंदी के प्रमुख कवियों एवं लेखकों (तुलसीदास, कबीर, सूरदास, प्रेमचंद आदि) की रचनाओं के माध्यम से विद्यार्थियों में साहित्यिक अभिरुचि एवं भाषा-सौंदर्य की समझ विकसित की जाती है।
निबंध लेखन, पत्र लेखन, संवाद लेखन एवं रचनात्मक अभिव्यक्ति के माध्यम से विद्यार्थियों की लेखन क्षमता एवं विचार-प्रस्तुति कौशल को निखारा जाता है।
भाषण, वाद-विवाद एवं काव्य-पाठ जैसी गतिविधियों के माध्यम से विद्यार्थियों में आत्मविश्वासपूर्ण एवं स्पष्ट मौखिक अभिव्यक्ति क्षमता का विकास किया जाता है।
कृपया ध्यान दें: हिंदी विषय की कक्षाएँ वैदिक अध्ययन के साथ निर्धारित समय-सारणी के अनुसार नियमित रूप से संचालित की जाती हैं, ताकि विद्यार्थी वैदिक ज्ञान के साथ-साथ राष्ट्रभाषा में भी दक्ष बनें। विस्तृत जानकारी हेतु पाठ्यक्रम विवरणिका पृष्ठ देखें।
"निज भाषा उन्नति अहै, सब उन्नति को मूल" — भारतेंदु हरिश्चंद्र का यह कथन मातृभाषा के महत्व को स्पष्ट करता है।