• पुरु॑ष ए॒वेदꣳ सर्वं॒ यद्भू॒तं यच्च॒ भा॒व्य॑म्। उ॒तामृ॑त॒त्वस्येशा॑नो॒ यदन्ने॑नाति॒रोह॑ति॥
  • ए॒तावा॑नस्य महि॒मातो॒ ज्यायाꣳ॑श्च॒ पूरु॑षः। पादो॑ऽस्य॒ विश्वा॑ भू॒तानि॑ त्रि॒पाद॑स्या॒मृतं॑ दि॒वि॥
  • त्रि॒पादू॒र्ध्व उदै॒त्पुरु॑षः॒ पादो॑ऽस्ये॒हाभ॑व॒त्पुनः॑। ततो॑ वि॒ष्वङ्व्य॑क्रामत्साशनानश॒ने अ॒भि॥
  • ततो॑ वि॒राडजायत वि॒राजो॒ अधि॒ पूरु॑षः। स जा॒तो अत्य॑रिच्यत प॒श्चाद्भूमि॒मथो॑ पु॒रः॥
  • तस्मा॑द्य॒ज्ञात्स॑र्व॒हुतः॒ सम्भृ॑तं पृषदा॒ज्यम्। प॒शूꣳस्ताꣳश्च॑क्रे वाय॒व्या॑नार॒ण्या ग्राम्या॑श्च॒ ये॥
  • तस्मा॑द्य॒ज्ञात्स॑र्व॒हुत॑ ऋ॒चः सामा॑नि जज्ञिरे। छन्दाꣳ॑सि जज्ञिरे॒ तस्मा॒द्यजु॒स्तस्मा॑दजायत॥
॥ श्रीमते रामनुजाय नमः ॥

पूर्व छात्र समुदाय

हमारे विद्यालय से शिक्षा प्राप्त कर चुके पूर्व बटुक आज समाज के विभिन्न क्षेत्रों में वैदिक ज्ञान, संस्कृति एवं परंपरा की ध्वजा को गर्व के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।

पं. सत्यनारायण शर्मा
पूर्व छात्र

पं. सत्यनारायण शर्मा

उत्तीर्ण वर्ष – 2018 (वेद विभूषण, अथर्ववेद)
आचार्य, काशी वेद विद्यापीठ, वाराणसी

इस विद्यालय से मिली शिक्षा और संस्कार आज भी मेरे जीवन की नींव हैं। गुरुजनों का मार्गदर्शन अमूल्य रहा है।

पं. ओमप्रकाश त्रिपाठी
पूर्व छात्र

पं. ओमप्रकाश त्रिपाठी

उत्तीर्ण वर्ष – 2019 (वेद भूषण, यजुर्वेद)
पुरोहित एवं कर्मकांडी, गोरखपुर

विद्यालय की गुरु-शिष्य परंपरा ने मुझे न केवल वेद ज्ञान दिया, बल्कि समाज में सम्मानजनक जीवन जीने की दिशा भी दी।

पं. मुकेश पाण्डेय
पूर्व छात्र

पं. मुकेश पाण्डेय

उत्तीर्ण वर्ष – 2020 (वेद विभूषण, ऋग्वेद)
शोधार्थी, सम्पूर्णानन्द संस्कृत विश्वविद्यालय

यहाँ के अनुशासन और अध्ययन पद्धति ने मुझे उच्च शिक्षा में शोध कार्य के लिए सक्षम बनाया।

पं. राजेश उपाध्याय
पूर्व छात्र

पं. राजेश उपाध्याय

उत्तीर्ण वर्ष – 2017 (वेद भूषण, सामवेद)
संगीत एवं सस्वर पाठ शिक्षक, उज्जैन

सामवेद के सस्वर गान की जो नींव यहाँ पड़ी, वही आज मेरी पहचान है। विद्यालय का आभारी हूँ।

पं. दीपक मिश्रा
पूर्व छात्र

पं. दीपक मिश्रा

उत्तीर्ण वर्ष – 2021 (वेद विभूषण, यजुर्वेद)
आचार्य, महर्षि सान्दीपनि प्रतिष्ठान, उज्जैन

मुझे गर्व है कि आज मैं उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहा हूँ, जिसने मुझे गढ़ा है।

पं. अभिषेक दुबे
पूर्व छात्र

पं. अभिषेक दुबे

उत्तीर्ण वर्ष – 2019 (वेद भूषण, अथर्ववेद)
ज्योतिष एवं वास्तु सलाहकार, प्रयागराज

वैदिक शिक्षा के साथ जो अनुशासन और संस्कार मिले, वे आज मेरे व्यावसायिक जीवन में भी काम आ रहे हैं।

हमारे पूर्व छात्र आज भारत के विभिन्न स्थानों में आचार्य, पुरोहित, शिक्षक एवं शोधार्थी के रूप में वैदिक ज्ञान की परंपरा को जीवंत बनाए हुए हैं। उनकी उपलब्धियाँ ही हमारे विद्यालय का गौरव हैं।

– विद्यालय परिवार