हमारे विद्यालय से शिक्षा प्राप्त कर चुके पूर्व बटुक आज समाज के विभिन्न क्षेत्रों में वैदिक ज्ञान, संस्कृति एवं परंपरा की ध्वजा को गर्व के साथ आगे बढ़ा रहे हैं।
पूर्व छात्रइस विद्यालय से मिली शिक्षा और संस्कार आज भी मेरे जीवन की नींव हैं। गुरुजनों का मार्गदर्शन अमूल्य रहा है।
पूर्व छात्रविद्यालय की गुरु-शिष्य परंपरा ने मुझे न केवल वेद ज्ञान दिया, बल्कि समाज में सम्मानजनक जीवन जीने की दिशा भी दी।
पूर्व छात्रयहाँ के अनुशासन और अध्ययन पद्धति ने मुझे उच्च शिक्षा में शोध कार्य के लिए सक्षम बनाया।
पूर्व छात्रसामवेद के सस्वर गान की जो नींव यहाँ पड़ी, वही आज मेरी पहचान है। विद्यालय का आभारी हूँ।
पूर्व छात्रमुझे गर्व है कि आज मैं उसी परंपरा को आगे बढ़ा रहा हूँ, जिसने मुझे गढ़ा है।
पूर्व छात्रवैदिक शिक्षा के साथ जो अनुशासन और संस्कार मिले, वे आज मेरे व्यावसायिक जीवन में भी काम आ रहे हैं।
हमारे पूर्व छात्र आज भारत के विभिन्न स्थानों में आचार्य, पुरोहित, शिक्षक एवं शोधार्थी के रूप में वैदिक ज्ञान की परंपरा को जीवंत बनाए हुए हैं। उनकी उपलब्धियाँ ही हमारे विद्यालय का गौरव हैं।
– विद्यालय परिवार