• पुरु॑ष ए॒वेदꣳ सर्वं॒ यद्भू॒तं यच्च॒ भा॒व्य॑म्। उ॒तामृ॑त॒त्वस्येशा॑नो॒ यदन्ने॑नाति॒रोह॑ति॥
  • ए॒तावा॑नस्य महि॒मातो॒ ज्यायाꣳ॑श्च॒ पूरु॑षः। पादो॑ऽस्य॒ विश्वा॑ भू॒तानि॑ त्रि॒पाद॑स्या॒मृतं॑ दि॒वि॥
  • त्रि॒पादू॒र्ध्व उदै॒त्पुरु॑षः॒ पादो॑ऽस्ये॒हाभ॑व॒त्पुनः॑। ततो॑ वि॒ष्वङ्व्य॑क्रामत्साशनानश॒ने अ॒भि॥
  • ततो॑ वि॒राडजायत वि॒राजो॒ अधि॒ पूरु॑षः। स जा॒तो अत्य॑रिच्यत प॒श्चाद्भूमि॒मथो॑ पु॒रः॥
  • तस्मा॑द्य॒ज्ञात्स॑र्व॒हुतः॒ सम्भृ॑तं पृषदा॒ज्यम्। प॒शूꣳस्ताꣳश्च॑क्रे वाय॒व्या॑नार॒ण्या ग्राम्या॑श्च॒ ये॥
  • तस्मा॑द्य॒ज्ञात्स॑र्व॒हुत॑ ऋ॒चः सामा॑नि जज्ञिरे। छन्दाꣳ॑सि जज्ञिरे॒ तस्मा॒द्यजु॒स्तस्मा॑दजायत॥
॥ श्रीमते रामनुजाय नमः ॥

अभिभावक समुदाय

हमारे विद्यालय की सफलता में अभिभावकों का विश्वास और सहयोग अत्यंत महत्वपूर्ण है। यहाँ पढ़िए हमारे बटुकों के अभिभावकों के अनुभव और विचार।

"इस विद्यालय में मेरे पुत्र ने न केवल वेदों का ज्ञान प्राप्त किया, बल्कि अनुशासन और संस्कार भी सीखे। आचार्यगण का स्नेह और मार्गदर्शन अद्भुत है।"

श्री रमेश चंद्र शर्मा
श्री रमेश चंद्र शर्मापिता – पं. अर्जुन शर्मा (वेद विभूषण, चतुर्थ वर्ष)

"गुरु-शिष्य परंपरा के अनुसार यहाँ जो शिक्षा दी जाती है, वह आज के समय में दुर्लभ है। हम विद्यालय परिवार के आभारी हैं।"

श्रीमती सुनीता देवी त्रिपाठी
श्रीमती सुनीता देवी त्रिपाठीमाता – पं. कृष्ण कुमार त्रिपाठी (वेद भूषण, तृतीय वर्ष)

"विद्यालय का वातावरण अत्यंत पवित्र एवं अनुशासित है। मेरे बेटे में आध्यात्मिक जागरूकता और आत्मविश्वास दोनों बढ़े हैं।"

श्री विनोद कुमार मिश्रा
श्री विनोद कुमार मिश्रापिता – पं. शिवम् मिश्रा (वेद विभूषण, द्वितीय वर्ष)

"आचार्यगण अपने विद्यार्थियों को अपने बच्चों की तरह स्नेह देते हैं। यहाँ की शिक्षा पद्धति संस्कारयुक्त और परंपरागत है।"

श्रीमती कमला पाण्डेय
श्रीमती कमला पाण्डेयमाता – पं. राघव पाण्डेय (वेद भूषण, प्रथम वर्ष)

"हमारे परिवार में पीढ़ियों से वेद अध्ययन की परंपरा रही है, और इस विद्यालय ने उस परंपरा को सही दिशा में आगे बढ़ाया है।"

श्री गोपाल दास उपाध्याय
श्री गोपाल दास उपाध्यायपिता – पं. गोविंद उपाध्याय (वेद विभूषण, पंचम वर्ष)

"विद्यालय द्वारा आयोजित सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेकर मेरे बेटे का आत्मविश्वास काफी बढ़ा है। शिक्षा के साथ संस्कार भी मिल रहे हैं।"

श्रीमती राधिका तिवारी
श्रीमती राधिका तिवारीमाता – पं. देवांश तिवारी (वेद भूषण, द्वितीय वर्ष)

आपका विश्वास ही हमारी सबसे बड़ी पूंजी है। अभिभावकों के सहयोग से ही हम वैदिक शिक्षा एवं संस्कृति के संरक्षण की दिशा में निरंतर आगे बढ़ रहे हैं।

विद्यालय परिवार