• पुरु॑ष ए॒वेदꣳ सर्वं॒ यद्भू॒तं यच्च॒ भा॒व्य॑म्। उ॒तामृ॑त॒त्वस्येशा॑नो॒ यदन्ने॑नाति॒रोह॑ति॥
  • ए॒तावा॑नस्य महि॒मातो॒ ज्यायाꣳ॑श्च॒ पूरु॑षः। पादो॑ऽस्य॒ विश्वा॑ भू॒तानि॑ त्रि॒पाद॑स्या॒मृतं॑ दि॒वि॥
  • त्रि॒पादू॒र्ध्व उदै॒त्पुरु॑षः॒ पादो॑ऽस्ये॒हाभ॑व॒त्पुनः॑। ततो॑ वि॒ष्वङ्व्य॑क्रामत्साशनानश॒ने अ॒भि॥
  • ततो॑ वि॒राडजायत वि॒राजो॒ अधि॒ पूरु॑षः। स जा॒तो अत्य॑रिच्यत प॒श्चाद्भूमि॒मथो॑ पु॒रः॥
  • तस्मा॑द्य॒ज्ञात्स॑र्व॒हुतः॒ सम्भृ॑तं पृषदा॒ज्यम्। प॒शूꣳस्ताꣳश्च॑क्रे वाय॒व्या॑नार॒ण्या ग्राम्या॑श्च॒ ये॥
  • तस्मा॑द्य॒ज्ञात्स॑र्व॒हुत॑ ऋ॒चः सामा॑नि जज्ञिरे। छन्दाꣳ॑सि जज्ञिरे॒ तस्मा॒द्यजु॒स्तस्मा॑दजायत॥
॥ श्रीमते रामनुजाय नमः ॥

उपाध्यक्ष महोदय

उपाध्यक्ष महोदय

श्री प्रेम नारायण त्रिपाठी

उपाध्यक्ष, श्री पद्मवैद्यम् तीर्थ वेद विद्यालय

श्री प्रेम नारायण त्रिपाठी जी विद्यालय की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था के सुचारु संचालन में अध्यक्ष महोदय के साथ मिलकर कार्य करते हैं। उनके निरंतर प्रयासों से विद्यालय में अनुशासन, समन्वय एवं संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित होती है, जिससे बटुकों को एक स्वस्थ शैक्षणिक वातावरण प्राप्त होता है।

वैदिक शिक्षा प्रशासन में 20+ वर्षों का अनुभव
विद्यालय की शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्था का संचालन
बटुकों एवं अभिभावकों से निकट संपर्क एवं मार्गदर्शन
सामाजिक सेवा एवं विद्यालय विकास कार्यों में योगदान

उपाध्यक्ष महोदय का संदेश

प्रिय अभिभावकों एवं विद्यार्थियों,

विद्यालय की दैनिक व्यवस्था एवं विद्यार्थियों के कल्याण को सुनिश्चित करना मेरे लिए न केवल एक जिम्मेदारी बल्कि एक सेवा है। हम निरंतर यह प्रयास करते हैं कि प्रत्येक बटुक को शुद्ध वैदिक शिक्षा के साथ-साथ स्वस्थ, अनुशासित एवं सुरक्षित वातावरण प्राप्त हो, जिसमें वे अपनी क्षमताओं का पूर्ण विकास कर सकें।

अभिभावकों का विश्वास एवं आचार्यगण का समर्पण ही हमारी सबसे बड़ी शक्ति है। हम प्रतिबद्ध हैं कि गुरु-शिष्य परंपरा की गरिमा को बनाए रखते हुए विद्यालय को उत्कृष्टता की ओर निरंतर अग्रसर करते रहेंगे।

सादर,
श्री प्रेम नारायण त्रिपाठी
उपाध्यक्ष, श्री पद्मवैद्यम् तीर्थ वेद विद्यालय