पुराण साहित्य सृष्टि-रचना, देव-चरित्र एवं धर्म-नीति की गाथाओं के माध्यम से जन-सामान्य तक वैदिक ज्ञान पहुँचाने का सशक्त माध्यम है। हमारे विभाग में विद्यार्थियों को अष्टादश महापुराणों एवं इतिहास ग्रंथों का व्यवस्थित अध्ययन कराया जाता है।


पुराण साहित्य में अठारह महापुराण मान्य हैं, जिनमें विष्णु पुराण, शिव पुराण, भागवत पुराण, मार्कण्डेय पुराण, गरुड़ पुराण आदि प्रमुख हैं। इनमें सृष्टि-रचना, देव-चरित्र, राजवंशों का इतिहास एवं धर्म-नीति का विस्तृत वर्णन मिलता है।
प्रत्येक पुराण में पाँच प्रमुख विषयों (पंचलक्षण) का वर्णन होता है — सर्ग (सृष्टि), प्रतिसर्ग (प्रलय एवं पुनःसृष्टि), वंश (देव-ऋषि वंशावली), मन्वंतर एवं वंशानुचरित (राजवंशों का इतिहास)।
अष्टादश पुराणों में श्रीमद्भागवत पुराण को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, जिसमें भगवान विष्णु के अवतारों, विशेषतः श्रीकृष्ण लीला का विस्तृत एवं भक्तिपूर्ण वर्णन है। यह भक्ति एवं वेदांत दर्शन का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत करता है।
पुराणों के साथ महर्षि वाल्मीकि रचित रामायण एवं महर्षि वेदव्यास रचित महाभारत का अध्ययन भी कराया जाता है, जो धर्म, कर्तव्य एवं जीवन-मूल्यों की शिक्षा देने वाले महान इतिहास ग्रंथ हैं।
कृपया ध्यान दें: पुराण एवं इतिहास ग्रंथों का अध्ययन विद्यार्थियों में धर्म, नैतिकता एवं भक्ति भावना विकसित करने हेतु सहायक विषय के रूप में सभी वर्षों में क्रमिक रूप से कराया जाता है। विस्तृत जानकारी हेतु पाठ्यक्रम विवरणिका पृष्ठ देखें।
"पुराणं सर्वशास्त्राणां प्रथमं ब्रह्मणा स्मृतम्" — पुराण को समस्त शास्त्रों में प्रथम कहा गया है, जो सामान्य जन तक वेद-ज्ञान पहुँचाने का सुगम माध्यम है।