• पुरु॑ष ए॒वेदꣳ सर्वं॒ यद्भू॒तं यच्च॒ भा॒व्य॑म्। उ॒तामृ॑त॒त्वस्येशा॑नो॒ यदन्ने॑नाति॒रोह॑ति॥
  • ए॒तावा॑नस्य महि॒मातो॒ ज्यायाꣳ॑श्च॒ पूरु॑षः। पादो॑ऽस्य॒ विश्वा॑ भू॒तानि॑ त्रि॒पाद॑स्या॒मृतं॑ दि॒वि॥
  • त्रि॒पादू॒र्ध्व उदै॒त्पुरु॑षः॒ पादो॑ऽस्ये॒हाभ॑व॒त्पुनः॑। ततो॑ वि॒ष्वङ्व्य॑क्रामत्साशनानश॒ने अ॒भि॥
  • ततो॑ वि॒राडजायत वि॒राजो॒ अधि॒ पूरु॑षः। स जा॒तो अत्य॑रिच्यत प॒श्चाद्भूमि॒मथो॑ पु॒रः॥
  • तस्मा॑द्य॒ज्ञात्स॑र्व॒हुतः॒ सम्भृ॑तं पृषदा॒ज्यम्। प॒शूꣳस्ताꣳश्च॑क्रे वाय॒व्या॑नार॒ण्या ग्राम्या॑श्च॒ ये॥
  • तस्मा॑द्य॒ज्ञात्स॑र्व॒हुत॑ ऋ॒चः सामा॑नि जज्ञिरे। छन्दाꣳ॑सि जज्ञिरे॒ तस्मा॒द्यजु॒स्तस्मा॑दजायत॥
॥ श्रीमते रामनुजाय नमः ॥

पुराण विभाग

पुराण साहित्य सृष्टि-रचना, देव-चरित्र एवं धर्म-नीति की गाथाओं के माध्यम से जन-सामान्य तक वैदिक ज्ञान पहुँचाने का सशक्त माध्यम है। हमारे विभाग में विद्यार्थियों को अष्टादश महापुराणों एवं इतिहास ग्रंथों का व्यवस्थित अध्ययन कराया जाता है।

विभागीय आचार्य

आचार्य श्री ब्रह्मानंद पाण्डेय

आचार्य श्री ब्रह्मानंद पाण्डेय

विभागाध्यक्ष – पुराण एवं इतिहास
विशेषज्ञता: श्रीमद्भागवत पुराण एवं कथा-प्रवचन
आचार्य (वेदांत), पुराणाचार्य
17+ वर्ष का अनुभव
आचार्य श्री यदुनाथ शर्मा

आचार्य श्री यदुनाथ शर्मा

सहायक आचार्य – पुराण एवं इतिहास
विशेषज्ञता: रामायण, महाभारत एवं विष्णु पुराण
पुराणाचार्य, शास्त्री (संस्कृत)
10+ वर्ष का अनुभव

प्रमुख ग्रंथ एवं विषय परिचय

अष्टादश महापुराण

पुराण साहित्य में अठारह महापुराण मान्य हैं, जिनमें विष्णु पुराण, शिव पुराण, भागवत पुराण, मार्कण्डेय पुराण, गरुड़ पुराण आदि प्रमुख हैं। इनमें सृष्टि-रचना, देव-चरित्र, राजवंशों का इतिहास एवं धर्म-नीति का विस्तृत वर्णन मिलता है।

पंचलक्षण एवं पुराण संरचना

प्रत्येक पुराण में पाँच प्रमुख विषयों (पंचलक्षण) का वर्णन होता है — सर्ग (सृष्टि), प्रतिसर्ग (प्रलय एवं पुनःसृष्टि), वंश (देव-ऋषि वंशावली), मन्वंतर एवं वंशानुचरित (राजवंशों का इतिहास)।

श्रीमद्भागवत पुराण

अष्टादश पुराणों में श्रीमद्भागवत पुराण को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है, जिसमें भगवान विष्णु के अवतारों, विशेषतः श्रीकृष्ण लीला का विस्तृत एवं भक्तिपूर्ण वर्णन है। यह भक्ति एवं वेदांत दर्शन का अद्भुत समन्वय प्रस्तुत करता है।

इतिहास ग्रंथ – रामायण एवं महाभारत

पुराणों के साथ महर्षि वाल्मीकि रचित रामायण एवं महर्षि वेदव्यास रचित महाभारत का अध्ययन भी कराया जाता है, जो धर्म, कर्तव्य एवं जीवन-मूल्यों की शिक्षा देने वाले महान इतिहास ग्रंथ हैं।

वर्ष-वार अध्ययन क्रम

प्रथम – द्वितीय वर्षपौराणिक कथाओं का सामान्य परिचय, रामायण एवं महाभारत की मुख्य कथाओं का श्रवण एवं वाचन, संस्कृत में सरल पुराण अंशों का पठन
तृतीय – चतुर्थ वर्षअष्टादश महापुराणों का परिचय, पंचलक्षण सिद्धांत का अध्ययन, विष्णु पुराण एवं शिव पुराण के चयनित अध्यायों का वाचन
पंचम वर्षश्रीमद्भागवत पुराण के चयनित स्कंधों का अध्ययन, मार्कण्डेय एवं गरुड़ पुराण का परिचय, वेद भूषण मूल्यांकन परीक्षा हेतु तैयारी
षष्ठम – सप्तम वर्ष (वेद विभूषण)श्रीमद्भागवत पुराण का गहन एवं विस्तृत अध्ययन, पुराण-कथा वाचन एवं प्रवचन कला का प्रशिक्षण, कथा-वाचन में प्रायोगिक दक्षता का विकास

कृपया ध्यान दें: पुराण एवं इतिहास ग्रंथों का अध्ययन विद्यार्थियों में धर्म, नैतिकता एवं भक्ति भावना विकसित करने हेतु सहायक विषय के रूप में सभी वर्षों में क्रमिक रूप से कराया जाता है। विस्तृत जानकारी हेतु पाठ्यक्रम विवरणिका पृष्ठ देखें।

"पुराणं सर्वशास्त्राणां प्रथमं ब्रह्मणा स्मृतम्" — पुराण को समस्त शास्त्रों में प्रथम कहा गया है, जो सामान्य जन तक वेद-ज्ञान पहुँचाने का सुगम माध्यम है।