• पुरु॑ष ए॒वेदꣳ सर्वं॒ यद्भू॒तं यच्च॒ भा॒व्य॑म्। उ॒तामृ॑त॒त्वस्येशा॑नो॒ यदन्ने॑नाति॒रोह॑ति॥
  • ए॒तावा॑नस्य महि॒मातो॒ ज्यायाꣳ॑श्च॒ पूरु॑षः। पादो॑ऽस्य॒ विश्वा॑ भू॒तानि॑ त्रि॒पाद॑स्या॒मृतं॑ दि॒वि॥
  • त्रि॒पादू॒र्ध्व उदै॒त्पुरु॑षः॒ पादो॑ऽस्ये॒हाभ॑व॒त्पुनः॑। ततो॑ वि॒ष्वङ्व्य॑क्रामत्साशनानश॒ने अ॒भि॥
  • ततो॑ वि॒राडजायत वि॒राजो॒ अधि॒ पूरु॑षः। स जा॒तो अत्य॑रिच्यत प॒श्चाद्भूमि॒मथो॑ पु॒रः॥
  • तस्मा॑द्य॒ज्ञात्स॑र्व॒हुतः॒ सम्भृ॑तं पृषदा॒ज्यम्। प॒शूꣳस्ताꣳश्च॑क्रे वाय॒व्या॑नार॒ण्या ग्राम्या॑श्च॒ ये॥
  • तस्मा॑द्य॒ज्ञात्स॑र्व॒हुत॑ ऋ॒चः सामा॑नि जज्ञिरे। छन्दाꣳ॑सि जज्ञिरे॒ तस्मा॒द्यजु॒स्तस्मा॑दजायत॥
॥ श्रीमते रामनुजाय नमः ॥

अध्यक्ष महोदय

अध्यक्ष महोदय

श्री वेजनाथ त्रिपाठी

अध्यक्ष, श्री पद्मवैद्यम् तीर्थ वेद विद्यालय

श्री वेजनाथ त्रिपाठी जी विगत तीन दशकों से वैदिक शिक्षा, संस्कृति एवं गुरु-शिष्य परंपरा के संरक्षण हेतु समर्पित रहे हैं। उनके मार्गदर्शन में विद्यालय ने वैदिक ज्ञान के प्रसार तथा विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास की दिशा में अनेक महत्वपूर्ण उपलब्धियाँ प्राप्त की हैं।

वैदिक शिक्षा में 30+ वर्षों का अनुभव
महर्षि सान्दीपनि प्रतिष्ठान से दीर्घकालिक जुड़ाव
सैकड़ों बटुकों को वैदिक शिक्षा हेतु मार्गदर्शन
गुरु-शिष्य परंपरा के संरक्षण हेतु समर्पित योगदान

अध्यक्ष महोदय का संदेश

प्रिय अभिभावकों एवं विद्यार्थियों,

श्री पद्मवैद्यम् तीर्थ वेद विद्यालय की स्थापना का उद्देश्य केवल वैदिक ग्रंथों का ज्ञान प्रदान करना ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, संस्कार, अनुशासन एवं आध्यात्मिक मूल्यों से समृद्ध करना है। गुरु-शिष्य परंपरा के आदर्शों के माध्यम से हम प्रत्येक बटुक में ज्ञान, संस्कार एवं आत्मविश्वास का संचार करने का प्रयास करते हैं।

मुझे पूर्ण विश्वास है कि हमारे विद्वान आचार्यगण के मार्गदर्शन में विद्यार्थी न केवल वेदों में पारंगत होंगे, बल्कि समाज में एक आदर्श एवं जिम्मेदार नागरिक के रूप में अपनी पहचान भी स्थापित करेंगे। हम सभी अभिभावकों एवं सहयोगियों के विश्वास एवं सहयोग के लिए हृदय से आभारी हैं।

सादर,
श्री वेजनाथ त्रिपाठी
अध्यक्ष, श्री पद्मवैद्यम् तीर्थ वेद विद्यालय