• पुरु॑ष ए॒वेदꣳ सर्वं॒ यद्भू॒तं यच्च॒ भा॒व्य॑म्। उ॒तामृ॑त॒त्वस्येशा॑नो॒ यदन्ने॑नाति॒रोह॑ति॥
  • ए॒तावा॑नस्य महि॒मातो॒ ज्यायाꣳ॑श्च॒ पूरु॑षः। पादो॑ऽस्य॒ विश्वा॑ भू॒तानि॑ त्रि॒पाद॑स्या॒मृतं॑ दि॒वि॥
  • त्रि॒पादू॒र्ध्व उदै॒त्पुरु॑षः॒ पादो॑ऽस्ये॒हाभ॑व॒त्पुनः॑। ततो॑ वि॒ष्वङ्व्य॑क्रामत्साशनानश॒ने अ॒भि॥
  • ततो॑ वि॒राडजायत वि॒राजो॒ अधि॒ पूरु॑षः। स जा॒तो अत्य॑रिच्यत प॒श्चाद्भूमि॒मथो॑ पु॒रः॥
  • तस्मा॑द्य॒ज्ञात्स॑र्व॒हुतः॒ सम्भृ॑तं पृषदा॒ज्यम्। प॒शूꣳस्ताꣳश्च॑क्रे वाय॒व्या॑नार॒ण्या ग्राम्या॑श्च॒ ये॥
  • तस्मा॑द्य॒ज्ञात्स॑र्व॒हुत॑ ऋ॒चः सामा॑नि जज्ञिरे। छन्दाꣳ॑सि जज्ञिरे॒ तस्मा॒द्यजु॒स्तस्मा॑दजायत॥
॥ श्रीमते रामनुजाय नमः ॥

खेल का मैदान

वैदिक अध्ययन के साथ-साथ शारीरिक स्वास्थ्य एवं खेल भावना का विकास भी उतना ही महत्वपूर्ण है। हमारे विद्यालय का खेल का मैदान बटुकों के सर्वांगीण विकास का एक अभिन्न हिस्सा है।

विद्यालय खेल का मैदान
शारीरिक एवं मानसिक विकास का केंद्र

मैदान की विशेषताएँ

विस्तृत खुला मैदान

विद्यालय परिसर में एक विस्तृत एवं सुरक्षित खुला मैदान उपलब्ध है, जहाँ विद्यार्थी विभिन्न खेलों का अभ्यास कर सकते हैं।

पारंपरिक एवं आधुनिक खेल सुविधाएँ

कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल, बैडमिंटन एवं क्रिकेट जैसे खेलों हेतु आवश्यक सामग्री एवं स्थान उपलब्ध कराया गया है।

योग एवं व्यायाम क्षेत्र

प्रातःकालीन योगाभ्यास एवं शारीरिक व्यायाम हेतु मैदान में एक अलग निर्धारित क्षेत्र रखा गया है।

प्रशिक्षक की देखरेख में अभ्यास

शारीरिक शिक्षा प्रशिक्षक की देखरेख में विद्यार्थियों को खेलकूद एवं व्यायाम का व्यवस्थित प्रशिक्षण दिया जाता है।

सुरक्षित एवं निगरानी युक्त वातावरण

मैदान में खेलते समय विद्यार्थियों की सुरक्षा एवं देखभाल हेतु आचार्यों एवं सेवकों द्वारा निरंतर निगरानी रखी जाती है।

प्रतियोगिताओं की तैयारी

जिला एवं संभाग स्तरीय खेल प्रतियोगिताओं हेतु विद्यार्थियों को नियमित अभ्यास एवं मार्गदर्शन प्रदान किया जाता है।

दैनिक खेल-कूद कार्यक्रम

6:00 AM – 7:00 AMप्रातःकालीन योगाभ्यास एवं व्यायाम
5:30 PM – 6:30 PMखेलकूद अभ्यास (कबड्डी, खो-खो, वॉलीबॉल आदि)
रविवार सांयकालअंतर-समूह मैत्री प्रतियोगिताएँ
विशेष अवसरवार्षिकोत्सव क्रीड़ा प्रतियोगिता

उपलब्धियाँ एवं लाभ

  • विद्यालय के बटुक जिले में आयोजित विभिन्न खेल प्रतियोगिताओं में निरंतर भाग लेते हैं।
  • कबड्डी एवं खो-खो प्रतियोगिताओं में विद्यालय की टीम ने अनेक अवसरों पर प्रथम स्थान प्राप्त किया है।
  • नियमित शारीरिक गतिविधि से विद्यार्थियों में अनुशासन, टीम भावना एवं नेतृत्व क्षमता का विकास होता है।
  • खेलकूद के माध्यम से वैदिक अध्ययन के साथ-साथ विद्यार्थियों का शारीरिक स्वास्थ्य भी सुदृढ़ रहता है।

कृपया ध्यान दें: खेल-कूद अवधि के दौरान विद्यार्थियों की सुरक्षा हेतु विद्यालय के नियमों का पालन अनिवार्य है। किसी चोट अथवा स्वास्थ्य समस्या की स्थिति में तुरंत विद्यालय स्टाफ को सूचित करें।

"शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्" — शरीर ही धर्म साधना का प्रथम साधन है; स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मन का वास होता है।