• पुरु॑ष ए॒वेदꣳ सर्वं॒ यद्भू॒तं यच्च॒ भा॒व्य॑म्। उ॒तामृ॑त॒त्वस्येशा॑नो॒ यदन्ने॑नाति॒रोह॑ति॥
  • ए॒तावा॑नस्य महि॒मातो॒ ज्यायाꣳ॑श्च॒ पूरु॑षः। पादो॑ऽस्य॒ विश्वा॑ भू॒तानि॑ त्रि॒पाद॑स्या॒मृतं॑ दि॒वि॥
  • त्रि॒पादू॒र्ध्व उदै॒त्पुरु॑षः॒ पादो॑ऽस्ये॒हाभ॑व॒त्पुनः॑। ततो॑ वि॒ष्वङ्व्य॑क्रामत्साशनानश॒ने अ॒भि॥
  • ततो॑ वि॒राडजायत वि॒राजो॒ अधि॒ पूरु॑षः। स जा॒तो अत्य॑रिच्यत प॒श्चाद्भूमि॒मथो॑ पु॒रः॥
  • तस्मा॑द्य॒ज्ञात्स॑र्व॒हुतः॒ सम्भृ॑तं पृषदा॒ज्यम्। प॒शूꣳस्ताꣳश्च॑क्रे वाय॒व्या॑नार॒ण्या ग्राम्या॑श्च॒ ये॥
  • तस्मा॑द्य॒ज्ञात्स॑र्व॒हुत॑ ऋ॒चः सामा॑नि जज्ञिरे। छन्दाꣳ॑सि जज्ञिरे॒ तस्मा॒द्यजु॒स्तस्मा॑दजायत॥
॥ श्रीमते रामनुजाय नमः ॥

ध्यान कक्ष / साधना हॉल

ध्यान कक्ष हमारे विद्यालय का आध्यात्मिक केंद्र है, जहाँ विद्यार्थी गुरु-शिष्य परंपरा के अनुसार संध्या वंदन, मंत्र जाप एवं ध्यान साधना के माध्यम से आत्मिक शांति एवं एकाग्रता प्राप्त करते हैं।

ध्यान कक्ष
आध्यात्मिक साधना का केंद्र

साधना हॉल की विशेषताएँ

शांत एवं पवित्र वातावरण

ध्यान कक्ष को शांति, पवित्रता एवं आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण वातावरण में तैयार किया गया है, जो साधना हेतु अत्यंत अनुकूल है।

प्रातःकालीन संध्या वंदन

प्रतिदिन प्रातःकाल विद्यार्थी गुरुजनों के साथ संध्या वंदन, गायत्री मंत्र जाप एवं ध्यान साधना का अभ्यास करते हैं।

वैदिक मंत्रोच्चारण एवं जाप

ध्यान कक्ष में वेद मंत्रों का सस्वर पाठ, गायत्री जाप एवं ओंकार साधना नियमित रूप से आयोजित की जाती है।

यज्ञ एवं हवन व्यवस्था

विशेष अवसरों एवं पर्वों पर यज्ञ-हवन का आयोजन इसी हॉल में विधि-विधान के साथ किया जाता है।

गुरु-शिष्य सत्संग

आचार्यगण द्वारा समय-समय पर आध्यात्मिक प्रवचन, सत्संग एवं जीवन-मूल्यों पर संवाद इस हॉल में आयोजित किया जाता है।

स्वाध्याय एवं आत्मचिंतन

विद्यार्थियों को नियमित ध्यान अभ्यास के माध्यम से एकाग्रता, आत्मसंयम एवं आंतरिक शांति विकसित करने का अवसर मिलता है।

दैनिक साधना कार्यक्रम

5:00 AM – 5:30 AMप्रातःकालीन संध्या वंदन एवं ध्यान
5:30 AM – 6:00 AMगायत्री मंत्र जाप एवं ओंकार साधना
7:00 PM – 7:30 PMसांयकालीन संध्या वंदन
प्रत्येक पूर्णिमाविशेष सामूहिक ध्यान एवं भजन संध्या
पर्व दिवसयज्ञ, हवन एवं वेद-पारायण

ध्यान साधना के लाभ

  • नियमित ध्यान अभ्यास से विद्यार्थियों में एकाग्रता एवं स्मरण शक्ति का विकास होता है।
  • मानसिक शांति एवं आत्मसंयम के माध्यम से विद्यार्थी तनावमुक्त एवं अनुशासित जीवन जीना सीखते हैं।
  • वैदिक मंत्रोच्चारण एवं जाप से शुद्ध उच्चारण क्षमता एवं आध्यात्मिक चेतना में वृद्धि होती है।
  • गुरु सान्निध्य में साधना से विद्यार्थियों में विनम्रता, संयम एवं सकारात्मक जीवन-मूल्यों का संचार होता है।

कृपया ध्यान दें: ध्यान कक्ष में प्रवेश एवं साधना के दौरान मौन एवं अनुशासन बनाए रखना अनिवार्य है। विशेष यज्ञ/हवन आयोजनों की जानकारी हेतु विद्यालय के शैक्षणिक कैलेंडर एवं अवकाश सूची पृष्ठ देखें।

"ध्यानमूलं गुरोर्मूर्तिः" — ध्यान का मूल गुरु की मूर्ति है; साधना से ही आत्मज्ञान की प्राप्ति संभव है।