• पुरु॑ष ए॒वेदꣳ सर्वं॒ यद्भू॒तं यच्च॒ भा॒व्य॑म्। उ॒तामृ॑त॒त्वस्येशा॑नो॒ यदन्ने॑नाति॒रोह॑ति॥
  • ए॒तावा॑नस्य महि॒मातो॒ ज्यायाꣳ॑श्च॒ पूरु॑षः। पादो॑ऽस्य॒ विश्वा॑ भू॒तानि॑ त्रि॒पाद॑स्या॒मृतं॑ दि॒वि॥
  • त्रि॒पादू॒र्ध्व उदै॒त्पुरु॑षः॒ पादो॑ऽस्ये॒हाभ॑व॒त्पुनः॑। ततो॑ वि॒ष्वङ्व्य॑क्रामत्साशनानश॒ने अ॒भि॥
  • ततो॑ वि॒राडजायत वि॒राजो॒ अधि॒ पूरु॑षः। स जा॒तो अत्य॑रिच्यत प॒श्चाद्भूमि॒मथो॑ पु॒रः॥
  • तस्मा॑द्य॒ज्ञात्स॑र्व॒हुतः॒ सम्भृ॑तं पृषदा॒ज्यम्। प॒शूꣳस्ताꣳश्च॑क्रे वाय॒व्या॑नार॒ण्या ग्राम्या॑श्च॒ ये॥
  • तस्मा॑द्य॒ज्ञात्स॑र्व॒हुत॑ ऋ॒चः सामा॑नि जज्ञिरे। छन्दाꣳ॑सि जज्ञिरे॒ तस्मा॒द्यजु॒स्तस्मा॑दजायत॥
॥ श्रीमते रामनुजाय नमः ॥

सामाजिक अध्ययन विभाग

वैदिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय इतिहास, संस्कृति, भूगोल एवं नागरिक कर्तव्यों की समझ विद्यार्थियों को एक जागरूक एवं जिम्मेदार नागरिक बनाने में सहायक है। हमारे विभाग में इन विषयों का सरल एवं रोचक ढंग से शिक्षण कराया जाता है।

विभागीय शिक्षक

श्री ओमप्रकाश दुबे

श्री ओमप्रकाश दुबे

विभागाध्यक्ष – सामाजिक अध्ययन विभाग
विशेषज्ञता: भारतीय इतिहास एवं नागरिक शास्त्र
एम.ए. (इतिहास), बी.एड.
14+ वर्ष का अनुभव
श्रीमती अर्चना पांडेय

श्रीमती अर्चना पांडेय

सहायक शिक्षिका – सामाजिक अध्ययन विभाग
विशेषज्ञता: भूगोल एवं समाजशास्त्र
एम.ए. (भूगोल), बी.एड.
8+ वर्ष का अनुभव

शिक्षण की मुख्य विशेषताएँ

इतिहास एवं भारतीय संस्कृति

प्राचीन, मध्यकालीन एवं आधुनिक भारतीय इतिहास तथा हमारी समृद्ध सांस्कृतिक धरोहर एवं स्वतंत्रता संग्राम की गाथाओं का अध्ययन विद्यार्थियों में राष्ट्रीय गौरव की भावना विकसित करता है।

नागरिक शास्त्र एवं शासन व्यवस्था

भारतीय संविधान, लोकतंत्र, मौलिक अधिकार-कर्तव्य तथा शासन व्यवस्था की मूल संरचना का परिचय विद्यार्थियों को जिम्मेदार एवं जागरूक नागरिक बनने हेतु प्रेरित करता है।

भूगोल एवं पर्यावरण अध्ययन

भारत एवं विश्व का भौगोलिक परिचय, प्राकृतिक संसाधन, जलवायु एवं पर्यावरण संरक्षण के महत्व को समझाते हुए विद्यार्थियों में भौगोलिक जागरूकता का विकास किया जाता है।

समाजशास्त्र एवं सामाजिक मूल्य

समाज की संरचना, सामाजिक समस्याओं एवं भारतीय समाज में गुरु-शिष्य परंपरा, संयुक्त परिवार जैसे मूल्यों के महत्व पर चर्चा के माध्यम से विद्यार्थियों में सामाजिक उत्तरदायित्व की भावना विकसित की जाती है।

वर्ष-वार अध्ययन क्रम

प्रथम – द्वितीय वर्षहमारा परिवार एवं समाज, गाँव-शहर का परिचय, भारत का सामान्य मानचित्र परिचय, राष्ट्रीय प्रतीकों की जानकारी
तृतीय – चतुर्थ वर्षप्राचीन भारतीय इतिहास का परिचय, भारत के राज्य एवं राजधानियाँ, नागरिक कर्तव्यों की सामान्य समझ
पंचम वर्षस्वतंत्रता संग्राम की प्रमुख घटनाएँ, भारतीय संविधान का परिचय, भारत का भौतिक भूगोल, वेद भूषण मूल्यांकन परीक्षा हेतु तैयारी
षष्ठम – सप्तम वर्ष (वेद विभूषण)आधुनिक भारतीय इतिहास एवं स्वतंत्रता आंदोलन का विस्तृत अध्ययन, भारतीय शासन व्यवस्था एवं लोकतंत्र, विश्व भूगोल एवं समसामयिक सामाजिक विषयों की समझ

कृपया ध्यान दें: सामाजिक अध्ययन विषय की कक्षाएँ वैदिक अध्ययन के साथ निर्धारित समय-सारणी के अनुसार नियमित रूप से संचालित की जाती हैं, ताकि विद्यार्थी वैदिक ज्ञान के साथ-साथ आधुनिक विषयों में भी दक्ष बनें। विस्तृत जानकारी हेतु पाठ्यक्रम विवरणिका पृष्ठ देखें।

"वसुधैव कुटुम्बकम्" — संपूर्ण पृथ्वी ही एक परिवार है। यह भारतीय दृष्टिकोण सामाजिक अध्ययन की सबसे बड़ी सीख है।